हम में है हीरो……
पेट्रोल के बढे हुए दाम की ख़बर हर दिन लगभग हर न्यूज़ चैनल और अखबार में आती ही रहती है। आम आदमी इतना परेशान और किसी बात से नही जितना महंगाई से है। एसी कमरों में बैठकर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों की उथल-पुथल और डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत की बातें करने वाले, ये नही जानते है शायद कि रोज़ाना खाने-पीने के सामान से लेकर,दवाई,स्कूल-कॉलेज की फ़ीस,किताब,कॉपी,ड़ॉक्टर,आने-जाने की तक़लीफ़ और अनायास ही प्रकट होने वाले ख़र्चों के साथ खुद को “हर एक” कितना अकेला, परेशान और मजबूर पाता है।
घर से सुबह निकलने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह सोचता है कि कैसे चार पैसे ज्यादा कमा ले; ताकि बीवी को एक अदद डिनर करा सके, ताकि बच्चे को उसका मनपंसद खिलौना लाकर दे सके। गृहणी सोचती है कि, गैस सिलेंडर को किस तरह किफ़ायत से चलाय कि वो पहले से कुछ दिन और ज्यादा खिंच सके।बच्चों और पति की खाने-पीने की फ़रमाईशों कि कैसे पूरा करे???
मध्यम वर्ग की इस ज़द्दोज़हद को ना तो उच्च वर्ग समझता है और ना ही निम्न वर्ग को इन सबसे कोई मतलब है।चाहे रिश्तेदारियां निभाना हो या सामाजिक सरोकार,कोई भी बंधन ,व्यवहार,रीत-चलन,कर्त्तव्य और अधिकार इन सब का अकेले ठेका इसी ‘जिम्मेदार’ वर्ग ने ले रखा है।
सचिन के शतक ना बनाने पर नाराज़ होने से लेकर ,अमेरिका में प्रेसीडेंट क्यों और क्या कर रहे है; तक मध्यम वर्ग की पकड मजबूत है॥चोरी,डकैती,लूट,आतंकवाद से लेकर बम-ब्लास्ट का शिकार भी सबसे अधिक यही वर्ग होता है। अन्ना हजारे के समर्थन में मज़मा लगाना हो या फ़िर सारेगामा में विनर के लिए वोटिंग करनी हो। अमरसिंह को जेल जाना हो या एश्वर्या की प्रेग्नेंसी न्यूज़,,यही मिडिल क्लास हर जगह अपनी जागरुक उपस्थिति दर्ज कराता है।
समय के समानांतर चलते हुये,समाज की ये मुख्य धारा हर युग हर कालखंड में बलिदान करती आई है परंतु ये भी सच है कि मानो जीवन और समाज का अस्तित्व भी इससे ही है। अभावों और संघर्षों में भी जीने की अदम्य इच्छा रखने वाला और स्वाभिमान को सर्वोपरि मानने वाला ये वर्ग घोर निराशा में भी हमेशा मुस्कुराता है। परंपराओं ,संस्कारों के संरक्षण का महान उत्तरदायित्व भी इसी के कांधों पर रहता है।हर समस्या को “अपनी” समस्या मानकर सोचने समझने और तर्क करने वाला ये वर्ग ही देश की आवाज़ है।
रहमान के लेटेस्ट गाने की लाईनें “हम में है हीरो” शायद इसी के लिए लिखी गई है। इतिहास साक्षी है कि समाज में कोई भी परिवर्तन हो, सबसे पहले यही वर्ग आगे बढकर उसे गले लगाता है। गोया कि हर हालात से तालमेल बिठाना और आगे बढते जाना ही मिडिल क्लास की तक़दीर है।
फ़िलहाल एक बार फ़िर मध्यम वर्ग की सतह पर हलचल हुई है और लहरों ने आने के संकेत दिए है। आधुनिक धुनों पर नाचनें, नये-नये गैजेट्स उपयोग करने, मॉल के हर कोने पर छा जाने(भले ही विंडो शॉपिंग के लिए) और हर छोटी बडी बातों में खुशियां तलाशने वाला ये सर्वाधिक शिक्षित वर्ग एक बार फ़िर कुछ बदलाव होने की आस लिए आसमान को ताक़ रहा है।
जाने कब ये स्वयं की शक्ति को पहचानेंगे?? मेरे विचार से तो अभी लोहा गरम है और हथौडे में भी गरमी है; फ़िर मारने में देर क्यूं?? कहीं ऐसा ना हो कि महंगाई और भ्रष्टाचार इस भोले-भाले वर्ग को पूरी तरह निगल जाये और देश में केवल दो वर्ग रह जाएं जिनको हर हाल में सिर्फ़ और सिर्फ़ अप्रभावित रहना है।ईश्वर कहीं तो ऐसी आग जलाए जिसकी तपन मध्यम वर्ग तक पहुंच कर उसे नींद से जगा दे॥ आमीन…