Wednesday 1 August 2012

तुम्हारा ख़्याल..


शाम को जब बिखरी लटों
और साडी पे ढेर सारी सलवटों के साथ
दफ़्तर से घर लौटती हूं जब,
सच में बस दो ही चीज़ें बेतरह याद आतीं हैं…
एक तो मां के हाथों का बना खाना
और दूजा तुम्हारी बाहों में मेरा थक के समां जाना,,
पर सूने घर में सिर्फ़ सामान पडा है अहसास नही;
यही भूल जाती हूं…और
अकेली शामों ,रोती हुई रातों में
बस अपने तकिये को सबसे करीब पाती हूं…।
गुनगुनी सी गर्म यादों की सिंकाई,
 ठंडे अलसाये जिस्मों दिमाग़ को
 फ़िर ताज़ा कर देती है…
फ़िर रात को मेरी थकान और तुम्हारी यादों,
की जद्दोज़हद शुरु होती है।
पुरसुकून सोने को तेरी बांहों के सिरहाने,
बेसहारा मेरी गरदन, जाने कब;
आंखों के साथ मिलकर
अगली सुबह होने वाले दफ़्तर के नज़ारे
को देखने में लग जाती है…
इसी उधेडबुन में तेरी यादों से मेरी थकावट,
जंग जीत जाती है।
तुम तो आते नही, अलबत्ता
नींद ज़रुर आ जाती है॥
सुबह उठते ही फ़िर,
सबसे पहले तुम्हारा ख़्याल
रात भर देखे तुम्हारे सपनों को,
यूं ही बिस्तर पर अलसाई पडी,
रिवर्स-फॉरवर्ड करके देखती हूं फ़िर से…
ठीक इसी वक्त ,मुझे दिनभर के लिए फ़िर से
दुनिया,दस्तूर और दफ़्तर के हवाले  छोडकर,
तुम्हारी याद शाम का वादा देकर
पलट कर चली जाती है…।
दिनभर की ख़ाक छानकर
जैसे ही घर की चौखट पे आती हूं,
ताज्जुब नही होता है,,
जब उन यादों को खुद के इंतज़ार में पाती हूं…।

5 comments:

  1. thanks for share,iss tarah ke unmaad aur akelapan na jaane kitno ke saath hota hai lekin uss bhavnaao ko kalam se kagaz par pirone ka naam hi lekhni hai aur aap ne iss bhavna ko bakhoobi likha hai.

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  2. ji ha hum sab ki ajkal yahi kahani hai...ye job kya kya chheen leti hai humse....

    apke behtareen cmnts k lie shukriya

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  3. स्वधा जी नमस्कार...
    आपके ब्लॉग 'itzz me...sharing myself' से कविता भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 7 अगस्त को 'तुम्हारा ख्याल...' शीर्षक के कविता को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में जाकर ई पेपर में पेज नं. 8 ब्लॉगरी में देख सकते है।
    धन्यवाद
    फीचर प्रभारी
    नीति श्रीवास्तव

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  4. thank you so much ise publish karne k lie....aabhar

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  5. इसी उधेडबुन में तेरी यादों से मेरी थकावट,
    जंग जीत जाती है।
    तुम तो आते नही, अलबत्ता
    नींद ज़रुर आ जाती है॥

    bahut khub

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