Tuesday 9 August 2011

अजीब है दिल के दर्द्……

"अजीब है दिल के दर्द यारों,
ना हो तो मुश्किल है जीना इसका,
जो हो तो हर दर्द एक हीरा,
हर एक ग़म है नगीना इसका"
                     कितनी हसीन लाईनें है ना????? ज़िन्दगी के फ़लसफ़े को बेहतर बयान करती है।बिना ग़म के जीने का क्या अर्थ और बगैर संघर्ष  के कैसा जीवन???कुछ लोग हमेशा रोते रहते हैं,,ये कहकर कि उनकी ज़िन्दगी मे बहुत दुख है,,मुझे लगता है ईश्वर कुछ खास लोगों को चुन लेते है;परीक्षा लेने के लिए,शायद उसे उन लोगों पर ज्यादा भरोसा होता है कि ये ज़रुर पास हो जाएंगे। और हममें से कुछ ये भी सोचते है कि, किसी-किसी को सब कुछ आसानी से प्राप्त है;मगर आसान कुछ भी नही होता………………………
               जिसके पास धन है,उसके पास सुकून नही। जिसके पास धन और सुकून दोनो है,उसके पास ये सुख भोगने के लिए आयु नही। और जिसके पास आयु भी है,उसके पास "प्रेम" नही॥और प्रेम के बिना तो स्वर्ग का सुख भी निरर्थक है…… गोया कि सबके हिस्से में अलग-अलग अभाव,उपलब्धियाँ ,कमियां और सुविधाएं  ऊपरवाले ने लिखी है; और हर हाल में खुश रहने के  सिर्फ़ 2 ही तरीके होते है-- या तो जो हासिल है,उसके साथ खुश रहना सीख लो,,या फ़िर जो मिला नही,उसके बिना खुश रहने की आदत डाल लो॥
          वास्तविक पुरषार्थी तो वही है जिसने भीषण दुख में भी अपने आंसू स्वंय भी नही देखे और ना ही किसी को दिखाए,क्योकि मुस्कराहटें  उसकी शक्ति ही नही,उसका जीवन-स्रोत बन जाती हैं॥

2 comments:

  1. सही लिखा है।
    दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं।
    एक वो जो भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमें दुख न दें, तकलीफ न दें...
    और दूसरे वो
    जो भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमें दुख और तकलीफों को सहने की शक्ति दे....
    पहले वाले इंसान इतिहास का हिस्‍सा बन कर रह जाते हैं और दूसरे वाले इतिहास बनाते हैं...
    अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम क्‍या चाहते हैं इतिहास का हिस्‍सा भीड का हिस्‍सा बनें या फिर खुद इतिहास लिखें।

    ..... और जिंदगी का दूसरा नाम ही है संघर्ष.... इससे बचकर जीना भी क्‍या जीना.....

    शुभकामनाएं आपको............ बेहतर लेखन के लिए.......

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  2. क्या जीवन बस संघर्ष मात्र है ? क्या दर्दों गम के बिना जीवन व्यर्थ है ?

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